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सरीला (हमीरपुर)। विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां प्रदेश सरकार ने करोड़ों पौधे लगाने का लक्ष्य तय कर हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया, वहीं जनपद के सरीला क्षेत्र में वन विभाग के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। वन विभाग ने “एक पेड़ मां के नाम” महाअभियान के तहत एक ही दिन में 57 हजार पौधे रोपित करने का दावा किया है, लेकिन यह पौधे आखिर कहां लगाए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। वन विभाग द्वारा कार्यक्रम के नाम पर लाखों रुपए के वारे न्यारे किए गए।
शुक्रवार को जलालपुर पौधशाला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सरीला राजकुमार गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि जीतू राजपूत और वन विभाग के अधिकारियों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि हकीकत दावों से काफी अलग है , वृक्षारोपण के नाम पर सिर्फ फोटो सेशन हुआ। वहीं वन विभाग सरीला में हरियाली के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक कार्यक्रम में गिने-चुने लोग मौजूद थे और पौधरोपण भी सीमित संख्या में ही हुआ जो कि सिर्फ फोटोशूट तक सीमित था।
हैरानी की बात यह है कि जिस गांव में कार्यक्रम आयोजित हुआ, वहां के ग्राम प्रधान का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम में बुलाया तक नहीं गया। प्रधान के अनुसार उनकी जानकारी में मौके पर मुश्किल से चंद पौधे लगाए गए, जबकि विभाग हजारों पौधे लगाने का दावा कर रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग हर साल लाखों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाता है, लेकिन पौधों के संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं होती। नतीजा यह होता है कि कुछ ही महीनों में अधिकांश पौधे सूख जाते हैं और अगले वर्ष फिर नए पौधे लगाने का दावा शुरू हो जाता है। लोगों का कहना है कि वृक्षारोपण अब पर्यावरण संरक्षण से ज्यादा फोटो सेशन और सरकारी आंकड़े चमकाने का माध्यम बन गया है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सरीला क्षेत्र में जिस विभाग ने हाल के वर्षों में सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर जंगल के जंगल कटवा दिए, वही विभाग अब हरियाली बचाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र के कई वन ब्लॉकों में जंगल लगातार कम होते जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कागजों में हरियाली बढ़ाने का दावा कर रहे हैं। वन माफिया विभाग के अधिकारियों की शह पर जंगलों का विनाश कर रहे है, वन क्षेत्र में अवैध खनन से वन संपदा को भारी क्षति पहुंचाई गई है।
अब क्षेत्र में चर्चा है कि यदि वास्तव में 57 हजार पौधे लगाए गए हैं तो वन विभाग को उनकी लोकेशन, संख्या और संरक्षण की व्यवस्था सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि अभियान की वास्तविकता सामने आ सके।

By AKC NEWS HINDI

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