हमीरपुर। गोहांड विकासखंड क्षेत्र की मसगवां ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों प्रधान और सचिव पर सरकारी योजनाओं में अनियमितता, घटिया निर्माण और फर्जी भुगतान कर गबन करने के आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।ग्रामीणों ने बताया कि गांव में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन धरातल पर अधिकांश कार्य बदहाल स्थिति में हैं। गांव में बना सामुदायिक शौचालय अव्यवस्थाओं का शिकार है। जिसमे पानी की टंकी से जुड़ी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है, अंदर निर्माण सामग्री बिखरी हुई है तथा नियमित सफाई और पानी की व्यवस्था नहीं है।
श्मशान घाट निर्माण को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही दीवारों में दरारें आने लगी हैं। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। पंचायत भवन की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार भवन की दीवारें और बाउंड्रीवाल जगह-जगह क्षतिग्रस्त हैं। मरम्मत के नाम पर धन खर्च दिखाए जाने के बावजूद भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। पंचायत भवन में बने शौचालय में गंदगी फैली हुई है, पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है तथा गेट और खिड़कियां टूटी हुई हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गौशाला में खड़ंजा निर्माण, सीसी निर्माण, हैंडपंप मरम्मत, सोलर कैमरा स्थापना, पेयजल मरम्मत, दवाई छिड़काव, नाला निर्माण और नाली सफाई जैसे कार्यों में भी अनियमितता बरती गई। उनका आरोप है कि कई योजनाओं में फर्जी भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गौशाला में अव्यवस्थाओं और गौवंशों की मौत के मामले में जिला विकास अधिकारी द्वारा 30 दिसंबर 2025 को पंचायत सचिव दीपक कुमार को निलंबित किया गया था। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं मुख्य विकास अधिकारी अरुण कुमार ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
