राठ (हमीरपुर)। विकासखंड क्षेत्र में जिला पंचायत निधि से कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों रुपये की लागत से निर्मित तीन आरसीसी सड़कें निर्माण के महज एक वर्ष के भीतर ही जर्जर हो गई हैं। जगह-जगह सड़क की परत उखड़ चुकी है, गहरी दरारें पड़ गई हैं और कई हिस्सों में सड़क धंस गई है। इससे न केवल ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है, बल्कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विकासखंड क्षेत्र में जिला पंचायत निधि से कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों रुपये की लागत से निर्मित तीन आरसीसी सड़कें निर्माण के एक वर्ष के भीतर ही जर्जर हो गई हैं। जगह-जगह सड़क की परत उखड़ चुकी है, गहरी दरारें पड़ गई हैं और कई हिस्सों में सड़क धंस गई है। सड़कों की हालत देखकर यह विश्वास करना मुश्किल है कि इनका निर्माण हाल ही में वर्ष 2024-25 में कराया गया था। विकासखंड क्षेत्र के नौहाई गांव तथा औड़ेरा-सैदपुर मार्ग का है। यहां केंद्रीय वित्त आयोग एवं जिला पंचायत निधि योजना के तहत तीन आरसीसी सड़कों का निर्माण कराया गया था। इनमें औड़ेरा-सैदपुर मुख्य मार्ग से रामस्वरूप मास्टर के फार्म हाउस तक, कालका देवी मंदिर से स्वामीदीन अहिरवार के घर तक तथा हरिजन बस्ती से औड़ेरा-सैदपुर पुलिया तक सड़क निर्माण शामिल है। निर्माण कार्य पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे और इसे ग्रामीणों के आवागमन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कराया गया था। लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद सड़कें टूटने लगीं। वर्तमान स्थिति यह है कि कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है, गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और सड़क में चौड़ी-चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ हिस्सों में सड़क धंस जाने से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान मानकों की अनदेखी की गई तथा गुणवत्ता से समझौता किया गया। ग्रामीण फूलवती राजपूत, सुमित रानी, कल्लू, देवकरन, भागबली, डालचंद्र, मनुआ सहित अन्य लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप हुआ होता तो सड़कें इतनी जल्दी खराब नहीं होतीं। उनका आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया और सड़क निर्माण की उचित निगरानी नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर ठेकेदारों और संबंधित लोगों ने आर्थिक लाभ कमाया, जबकि जनता को बदहाल सड़कें मिलीं। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब सड़क निर्माण कार्य चल रहा था, तब गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारी और अभियंता आखिर कहां थे। यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ था तो एक वर्ष के भीतर सड़कें जर्जर कैसे हो गईं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की नियमित जांच और तकनीकी परीक्षण केवल कागजों तक सीमित दिखाई देते हैं। गांव के लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर खर्च किए गए लाखों रुपये का अपेक्षित लाभ जनता को नहीं मिला। सड़कों की वर्तमान स्थिति सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर रही है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी ठेकेदारों, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो सरकारी धन की बर्बादी और घटिया निर्माण कार्यों का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। फिलहाल नौहाई गांव और आसपास के क्षेत्रों में बदहाल पड़ी ये सड़कें विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। अब लोगों की निगाहें जिला पंचायत और जिलाधिकारी पर टिकी हैं कि वे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
