हमीरपुर। कलेक्ट्रेट स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सभागार में जिलाधिकारी अभिषेक गोयल की अध्यक्षता में जनपद में संचालित 50 लाख रुपये से अधिक लागत की निर्माण परियोजनाओं, सड़क एवं भवन निर्माण कार्यों तथा श्रम विभाग से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में जिलाधिकारी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया कि निर्माणाधीन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता एवं स्वीकृत मानकों के अनुरूप पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति में संतुलन होना चाहिए। केवल भौतिक प्रगति दर्शाकर वित्तीय प्रगति को लंबित रखना स्वीकार्य नहीं होगा। सभी कार्यों में समयबद्ध भुगतान एवं प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।समीक्षा के दौरान लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, यूपीपीसीएल, सीएनडीएस, जल निगम, सेतु निगम एवं अन्य कार्यदायी संस्थाओं द्वारा संचालित परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना की नियमित निगरानी की जाए तथा किसी भी स्तर पर गुणवत्ता संबंधी कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि निर्माण सामग्री एवं कार्यों की नियमित टेस्टिंग कराई जाए। उन्होंने कहा कि जनपद में गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ सड़कें उपलब्ध कराना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है तथा गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।बैठक में श्रमिकों की सुरक्षा एवं कल्याण पर विशेष बल देते हुए जिलाधिकारी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण स्थलों पर पर्याप्त संख्या में श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा उनके लिए सभी आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। भीषण गर्मी एवं लू के दृष्टिगत कार्यस्थलों पर शेड, स्वच्छ पेयजल, प्राथमिक उपचार किट, सुरक्षा उपकरण एवं आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।जिलाधिकारी ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी दामोदर प्रसाद अग्रहरि को निर्देशित किया कि सभी निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा जहां श्रमिकों के लिए निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां तत्काल नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सभी निर्माण श्रमिकों का श्रम विभाग में पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराया जाए, जिससे वे विभागीय कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।उन्होंने बताया कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के लिए पांच लाख रुपये तक की दुर्घटना बीमा सुरक्षा का प्रावधान है। साथ ही महिला एवं पुरुष श्रमिकों के लिए पृथक शौचालय, विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल, बच्चों की देखभाल हेतु आवश्यक सुविधाएं तथा अन्य मानक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना कार्यदायी संस्थाओं की जिम्मेदारी है।जिलाधिकारी ने श्रम विभाग को निर्देश दिए कि निर्माण श्रमिकों के बीच विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिकाधिक श्रमिक शासन की कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो सकें।बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी एवं विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
