राठ (हमीरपुर)। कस्बे के गायत्री शक्तिपीठ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। कथा कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. एलएल त्रिपाठी ने कहा कि कथाएं मनुष्य के जीवन को प्रभावित करती हैं। श्रोता और वक्ता दोनों को अपनी मनोभूमि तैयार करनी होती है। कथाओं को सुनकर अपराधियों के जीवन में भी बदलाव देखा गया है। उन्होंने गायत्री परिवार के परिजनों से कथा की सरिता को घर-घर और गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया। कथा व्यास पंडित कुमार स्वामी ने महाभारत युद्ध के बाद भीष्म पितामह और भगवान श्रीकृष्ण के संवाद का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि दुर्योधन का अन्न ग्रहण करने से भीष्म की बुद्धि कुंठित हुई और वे उस समय अन्याय का विरोध नहीं कर सके। श्रीकृष्ण के दर्शन और चर्चा से उन्हें शांति मिली और वे सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करने लगे। मुख्य ट्रस्टी पंडित चंद्र शेखर मिश्र ने कहा कि आचार्य श्रीराम शर्मा ने भगवान राम, कृष्ण और शिव की कथाओं को लोक शिक्षण का माध्यम बनाया और प्रज्ञा पुराण की रचना की। पितृ पक्ष में देव पूजन, सामूहिक तर्पण, पिंडदान, पंच बलि और गायत्री यज्ञ में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। कथा में पंडित राम प्रकाश चतुर्वेदी, गिरीश बुधौलिया, अरविन्द श्रीवास्तव, राम प्रकाश गुप्त, भोजराज राजपूत, गौरी शंकर पुजारी, डॉ. श्याम बिहारी, गुलाब सिंह, तेज बहादुर मिश्र, हरि शंकर गुप्त, लक्ष्मण सिंह दद्दू, रानी सोनी, कुसुम गुप्ता, अनीता विश्वकर्मा, सुशीला, पूनम साहू, मैया दीन गुप्ता, नीलम गुप्ता सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।