बिजली चोरी जांच के दौरान कथित वसूली का आरोप, अधिकारी बोले– वीडियो की होगी जांच; अधिशाषी अभियंता से सवाल पूछने पर अधिकारी भड़के व पत्रकार पर लगाए ब्लैकमेलिंग के आरोप
हमीरपुर। जिले में बिजली विभाग की विजिलेंस टीम की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने विभाग की कार्यशैली और पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। वीडियो में कथित तौर पर एक व्यक्ति उपभोक्ता से यह कहते हुए दिखाई देता है कि “₹12 हजार में बात हो गई है, साहब को ₹12 हजार देने हैं, इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होगी।” इसके बाद वह उपभोक्ता से रुपये लेकर दोबारा कार्यालय के अंदर जाता हुआ दिखाई देता है। जानकारी के अनुसार, विजिलेंस विभाग की टीम इन दिनों गांव-गांव जाकर बिजली चोरी और अनियमित कनेक्शनों की जांच कर रही है। आरोप है कि जांच के दौरान जिन उपभोक्ताओं के मीटर, सर्विस लाइन या बिजली उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है, उनकी फोटो और वीडियो बनाकर विजिलेंस टीम अपने पास सुरक्षित कर लेती है। इसके बाद संबंधित उपभोक्ताओं को विभागीय कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बुलाया जाता है। इसी बीच सामने आए वायरल वीडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति कार्यालय के भीतर अधिकारियों से बातचीत करता हुआ दिखाई देता है। कुछ देर बाद वह बाहर निकलकर उपभोक्ता से कहता है कि मामला ₹12 हजार में तय हो गया है और यह रकम अधिकारियों तक पहुंचानी होगी। वीडियो में उपभोक्ता उसे नकद रुपये देता हुआ भी दिखाई देता है। इसके बाद वह व्यक्ति रुपये लेकर दोबारा कार्यालय के अंदर जाता नजर आता है। ऑडियो वीडियो के वायरल होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वीडियो में किए जा रहे दावे सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला होगा बल्कि बिजली चोरी रोकने के नाम पर चलाए जा रहे अभियान की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा। इस संबंध में जब संबंधित जिम्मेदार अधिकारी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या दोषी पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मौके पर मौजूद अधीक्षण अभियंता के सामने अधिशाषी अभियंता लेखराज सिंह से जब पत्रकारों ने वायरल वीडियो और लगाए जा रहे आरोपों पर पक्ष जानना चाहा तो वह नाराज हो गए। आरोप है कि उन्होंने पत्रकार पर ही ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराकर जेल भेजने तक की चेतावनी दे डाली। इस घटनाक्रम के बाद पत्रकारों और स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वीडियो में दिख रहा घटनाक्रम सही है तो आखिर कार्यालय के भीतर किस आधार पर कथित सौदेबाजी हो रही थी? उपभोक्ताओं से नकद रुपये लेने वाला व्यक्ति कौन है? उसका विभाग से क्या संबंध है? और यदि वीडियो भ्रामक है तो इसकी सच्चाई सामने लाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें विभागीय जांच पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल ऑडियो और वीडियो में दिख रहे दावे कितने सही हैं और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
