राठ (हमीरपुर)। विश्वविद्यालय को लेकर सोशल मीडिया पर अलग बहस छिड़ी है, मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रबंध समिति का प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ यदि मिला होता तो विश्वविद्यालय बन गया होता। सीएम की इस बात को स्थानीय जनता ने गम्भीरता लिया और महाविद्यालय प्रबंधन पर कार्यवाही न करने का आरोप लगाया। इस पर महाविद्यालय प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री महोदय ने दो विकल्प दिये थे, पहला प्रबंध समिति सरकार को महाविद्यालय की सम्पूर्ण प्रापर्टी सौंप दे अथवा 20 एकड़ भूमि उपलब्ध कराते हुए निजी विश्वविद्यालय का संचालन कर सकता है। प्रबंध समिति ने दूसरा विकल्प चयनित कर दिनांक 28 अप्रैल 2023 को प्रस्ताव एवं टोला गांव स्थित भूमि के कागज प्रेषित किये थे। यह मुद्दा क्षेत्र में काफी गरमा गया और सोशल मीडिया पर बहस के साथ कटाक्ष भी लोग करने लगे।
आज जब ब्रह्मानंद इण्टर कालेज के प्रबंधक डा.उमाकांत सिंह ने जब अपना बयान जारी किया तो सारा मामला ही बदल गया डा. उमाकांत ने बताया कि वह विश्वविद्यालय बनने के पक्ष में है और विश्वविद्यालय क्षेत्र में आगामी पीढ़ियों के लिए उपयोगी होगा। उन्होंने बताया कि वह विश्वविद्यालय के लिए इण्टर कालेज की भूमि देने की स्वीकृति भी दे चुके है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय प्रबंध समिति ने विश्वविद्यालय के लिए जो प्रस्ताव भेजा था उसकी जांच जिलाधिकारी हमीरपुर के माध्यम से राठ पहुंची थी और जांच के बाद पाया गया था कि टोला स्थित भूमि इण्टर कालेज की है महाविद्यालय की नहीं, इसलिए कार्यवाही को रद्द कर दिया गया। उन्होंने बताया टोला स्थित भूमि इण्टर कालेज की है जिसका वाद भी न्यायालय में विचाराधीन है। डा.उमाकांत सिंह ने कहा कि यदि महाविद्यालय विश्वविद्यालय के लिए इण्टर कालेज से भूमि मांगते तो वह पहले कही देने के लिए कह चुके है और दे देते मगर उनसे भूमि नहीं मांगी गई। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री के पद की गरिमा को समझे, सीएम एक संत है उनके प्रति मन में गलत सोच न रखे। उन्होंने कहा कि स्वामी ब्रह्मानंद विश्वविद्यालय के लिए क्षेत्रवासियों के हित में वह इण्टर कालेज भूमि सहर्ष देने को तैयार है।
