राठ (हमीरपुर)। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग पांच माह पूर्व अधीक्षक के रूप में पदभार ग्रहण करने आए हड्डी रोग विशेषज्ञ ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में भरपूर सुधार किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं चिकित्सा करते हुए हजारों मरीजों का इलाज करने के साथ-सा कई प्रकार की नि:शुल्क जांचों को करवाना शुरू कर दिया है।
बताते चलें कि 1 दिसंबर 2025 को नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक के रूप में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार यादव ने कार्यभार ग्रहण किया था। तब क्षेत्र में एक भी हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उक्त रोग से पीड़ित मरीज को जिलाचिकित्सालय साहित झांसी व उरई इत्यादि जगह जाकर समय व हजारों रुपए खर्च कर अपना इलाज करने के लिए मजबूर होना पड़ता था। लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में हड्डी रोग विशेषज्ञ के आने के बाद वह प्रतिदिन डेढ़ सौ से 200 मरीजों का इलाज करते हैं।
डॉ. अरविंद कुमार यादव ने बताया कि वे अभी तक लगभग पच्चीस से तीस हजार हड्डी एवं अस्थि रोग से संबंधित मरीजों का सफल उपचार कर चुके हैं। उन्होंने फ्रैक्चर के मरीजों के साथ-साथ घुटने के दर्द, कमर दर्द तथा अन्य अस्थि रोगों से पीड़ित मरीजों का प्रभावी इलाज किया है।
उन्होंने बताया कि पहले जो मरीज झांसी, ग्वालियर आदि शहरों के निजी अस्पतालों में अधिक खर्च करने के बावजूद पूर्णतः ठीक नहीं हो पा रहे थे। वे अब सीएचसी राठ में उपचार लेकर लाभान्वित हो रहे हैं।
वर्तमान में उरई, महोबा, बांदा, छतरपुर तथा झांसी के आसपास के क्षेत्रों से भी मरीज सीएचसी राठ में इलाज के लिए आ रहे हैं। इसके साथ ही ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटना), प्लांटर फैसाइटिस तथा लोअर बैक पेन जैसे रोगों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा रहा है। यहां इंट्रा-आर्टिकुलर इंजेक्शन एवं पीआरपी थेरेपी जैसी आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिसमें मरीज के अपने रक्त से लैब में तैयार कर उपचार किया जाता है। इससे मरीजों को काफी लाभ मिल रहा है और स्वस्थ होकर वे संतुष्टि हो लौट रहे हैं।
डॉ. यादव के सीएचसी राठ में आने से अनावश्यक रेफर में काफी कमी आई है। केवल उन्हीं मरीजों को उच्च केंद्र रेफर किया जाता है, जिनका इलाज यहां संभव नहीं है, जैसे कि जटिल ऑपरेशन की आवश्यकता वाले या गंभीर हृदय रोगी।
इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल की स्वच्छता बनाए रखना,ओपीडी में मरीजों के बैठने की उचित व्यवस्था,
सभी मरीजों को समय पर देखना, किसी भी मरीज की उपेक्षा न होना
सभी को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना है।
