हमीरपुर। जिले के सरीला विकासखंड क्षेत्र में विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जहां जमीन पर काम का नामोनिशान तक नहीं दिख रहा, वहीं कागजों में धड़ल्ले से दर्जनों मजदूरों की डिमांड दर्ज कर सरकारी खजाने में सेंध लगाने की तैयारी चल रही है। ग्रामीणों ने इस पूरे फर्जीवाड़े को लेकर मोर्चा खोलते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है सामने आए मामलों के अनुसार, ग्राम भेड़ी डॉडा में मुख्य मार्ग से राजेंद्र के डेरा तक ‘जल रोक बांध’ और ‘घरौंडा तालाब’ की खुदाई के नाम पर कुल 203 मजदूरों की डिमांड दिखाई गई है। इसी तरह ग्राम कुपरा (हासऊ पुर शेषा) में मुख्य मार्ग से तालाब तक जल रोक बांध निर्माण के नाम पर 28 मजदूरों की हाजिरी/डिमांड दर्ज है।
ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर न तो बांध का कोई अपेक्षित काम चल रहा है और न ही तालाब की वास्तविक खुदाई नजर आ रही है। कागजों में कुल 231 मजदूरों का भारी-भरकम अमला जुटा दिया गया, जबकि मौके की हकीकत इसके बिल्कुल उलट है सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के दौरान भी यह डिमांड दिखाई गई। सवाल यह उठता है कि जिस मौसम में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है और खुले में मिट्टी व जल-संरक्षण का काम लगभग असंभव है, उस दौरान कार्यस्थल पर असल में कितने मजदूर मौजूद थे? क्या बारिश में भी फर्जी मस्टररोल और फर्जी डिमांड का खेल जारी रहा अब सबकी निगाहें संबंधित उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर कार्यस्थल की स्थिति, मस्टर रोल और डिजिटल रिकॉर्ड का निष्पक्ष मिलान करेगा, या फिर यह मामला भी जांच की फाइलों में दबा दिया जाएगा।
