राठ (हमीरपुर)। मेला जलविहार समिति राठ के तत्वाधान में जलविहार मंदिर प्रांगण में चल रही राम कथा के पंचम दिवस चित्रकूट धाम से पधारे श्री जगदगुरु धीरेन्द्राचार्य जी ने चित्रकूट निवास, भरत मिलाप , और दंडकारण्य प्रवेश/अरण्य कांड के प्रमुख प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया चित्रकूट में निवास और महिमा,भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के साथ तमसा, गेंदा और कुलिंग नदी पार करते हुए चित्रकूट पहुंचते हैं।”रघुपति चित्रकूट बसि नाना। चरित किए श्रुति सुधा समाना॥” • महर्षि वाल्मीकि और अत्रि ऋषि का दर्शन तथा माता अनुसूया द्वारा माता सीता को पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया इस दिन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन प्रसंग सुनाया। भरत-मिलाप का भावुक प्रसंग मे जब भरत जी को अयोध्या का राजा बनाने का षड्यंत्र पता चलता है, तो वे उसका त्याग कर अपने भाई राम को मनाने के लिए सेना और नगरवासियों के साथ चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। राम और भरत का मिलाप भाई-भाई के प्रेम, त्याग और निष्ठा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। भरत जी राम की चरण-पादुका लेकर वापस अयोध्या लौटते हैं और नंदीग्राम में रहकर तपस्वियों जैसा जीवन जीते हैं।
पंचवटी का प्रसंग,मे जहां भगवान राम कुटी बनाकर कुछ समय बिताते हैं, और राक्षसों के अत्याचार से ऋषियों-मुनियों को मुक्त करने का संकल्प लेते हैं।
अंत में संतों द्वारा यह संदेश दिया जाता है कि राम का जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी मर्यादा, संयम और भाई के प्रति प्रेम का पाठ पढ़ाता है।
राम कथा मे श्री मेला जल विहार समिति के बी के अग्रवाल श्याम सुंदर मुखिया कुरा शंकर अग्रवाल दादा रामनरेश गुप्ता दीपक अग्रवाल शिवकुमार अग्रवाल गिरीश अग्रवाल, राहुल सोनी सत्यनारायण गुप्ता ठेकेदार राजू सोनी श्याम करन सहित सेकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।
