हमीरपुर। जिले में गौशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन ने अब मामले का संज्ञान लिया है। सरीला विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुपरा में गौशाला की व्यवस्था और वहां दर्ज गौवंशों की संख्या को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने जांच के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला के अभिलेखों में 200 से अधिक गौवंश दर्ज हैं, जबकि बड़ी संख्या में गौवंश खुले में घूम रहे हैं। ये छुट्टा गौवंश किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीण शिवम, बाबू सिंह, रतन यादव, लल्लू यादव, सत्य देव पाण्डेय, आत्माराम पाण्डेय, भरत किशोर अनुरागी और मोतीराम पाण्डेय समेत अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि गौवंशों की संख्या के नाम पर लंबे समय से कथित रूप से भुगतान किया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि गौशाला में 200 से अधिक गौवंश दर्ज हैं तो बड़ी संख्या में पशु खुले में कैसे घूम रहे हैं?
गौशाला में कितने गौवंश, अभिलेखों में कितने
किसानों का कहना है कि खुले में घूम रहे गौवंशों की समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन प्रभावी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए गौशाला में दर्ज गौवंशों की संख्या, उनके रखरखाव, चारे-पानी की व्यवस्था और किए गए भुगतानों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट होगा कि गौशाला के अभिलेखों में दर्ज गौवंशों की संख्या और मौके पर मौजूद गौवंशों की वास्तविक संख्या में कितना अंतर है। साथ ही भुगतान से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है, यह भी जांच के बाद ही सामने आएगा।
जांच के आदेश से मचा हड़कंप
डीएम के जांच के निर्देश के बाद गौशाला व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदारों में खलबली मची है। वहीं किसानों और ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हुई तो गौशाला की व्यवस्थाओं और अभिलेखों में दर्ज गौवंशों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
