कुरारा, (हमीरपुर)। विकास खंड क्षेत्र के झलोखर गांव स्थित करीब 700 वर्ष प्राचीन भुइयाँरानी माँ भुवनेश्वरी मंदिर में आषाढ़ माह के अंतिम रविवार को श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माँ भुवनेश्वरी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
आषाढ़ माह में लगने वाले इस धार्मिक मेले को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। शनिवार से ही दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने रात मंदिर परिसर में विश्राम किया और रविवार सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वहीं रात भर भजन कीर्तन चलते रहे,परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने उपलों व कंडों की आग में भौरियां बनाकर माँ को अर्पित कीं और प्रसाद ग्रहण किया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार माँ भुवनेश्वरी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। मान्यता है कि मंदिर परिसर की पवित्र मिट्टी (रज) का शरीर पर लेपन करने से गठिया-वात जैसे रोगों में आराम मिलता है। इसी आस्था के चलते दूर-दराज से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और पवित्र रज का लेपन करते हैं।
बताया जाता है कि माँ भुवनेश्वरी मंदिर का इतिहास करीब 700 वर्ष पुराना है। प्राचीन ब्रिटिश गजेटियर में भी भुइयाँरानी मंदिर की महिमा और यहां आयोजित होने वाले मेले का उल्लेख मिलता है, जो इस धार्मिक स्थल के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को दर्शाता है मेले में महिलाओं और बच्चों ने जमकर खरीदारी की। बच्चों ने झूलों का लुत्फ उठाया, वहीं विभिन्न दुकानों पर दिनभर चहल-पहल बनी रही। मेले की व्यवस्थाओं में ग्रामवासियों का विशेष सहयोग रहा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना पुलिस भी मेला परिसर में मौजूद रही आषाढ़ माह के अंतिम रविवार को पूरे मंदिर परिसर में ‘जय माँ भुवनेश्वरी’ के जयकारे गूंजते रहे और वातावरण भक्तिमय बना रहा।वहीं नवयुवक कमेटी द्वारा सुबह से भंडारा का प्रसाद वितरित किया जाता रहा।
