राठ (हमीरपुर)। श्री मेला जलविहार समिति की ओर से आयोजित 16 दिवसीय जलविहार महोत्सव के तहत चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वृंदावन धाम से आए कथावाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री ने नरसिंह अवतार, वामन चरित्र, राम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथावाचक ने हिरण्यकश्यप और भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में अवतरित हो सकते हैं। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को अनेक यातनाएं दीं, लेकिन उनकी भक्ति नहीं डिगी। जब हिरण्यकश्यप ने पूछा कि उसका भगवान कहां है तो प्रहलाद ने कहा कि भगवान सर्वत्र विद्यमान हैं। इसके बाद भगवान विष्णु नरसिंह रूप में खंभे से प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रहलाद की रक्षा की। इसके बाद कथावाचक ने वामन चरित्र और भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनाया। श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है तो भगवान धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया। इसके बाद उन्हें गोकुल पहुंचाया गया, जहां नंद बाबा और यशोदा के घर आनंद का माहौल छा गया और नंदोत्सव मनाया गया। उन्होंने कहा कि नंदोत्सव केवल भगवान के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि अपने हृदय में परमात्मा के आनंद के प्रकट होने का प्रतीक है। जब मनुष्य के हृदय में भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम जागता है, तभी वास्तविक आनंद का अनुभव होता है। कथा में समिति अध्यक्ष केजी अग्रवाल, महामंत्री डॉ. राम गोपाल गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, रमेश चंद्र सर्राफ, काशी प्रसाद गुप्ता, मनोज सोनी, पंकज सोनी, राजू सोनी, प्रदीप सोनी, गिरीश अग्रवाल, राकेश मिश्रा, श्याम करन, अवधेश जड़िया, सुरेश खेवरिया समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
