राठ (हमीरपुर)। कस्बे के नहर बाईपास स्थित सिंचाई विभाग के सपरार प्रखंड (झांसी) कार्यालय परिसर में शीशम व जामुन के बेशकीमती हरे पेड़ों की कटान का मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों, वन विभाग अथवा जिला प्रशासन से अनुमति लिए बिना करीब छह पेड़ों की कटान कराई गई। इसके बाद काटी गई लकड़ी को ट्रैक्टरों के जरिए परिसर से बाहर ले जाने की बात भी सामने आई है। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की। कस्बेवासियों का आरोप है कि पेड़ों की कटान के बाद लकड़ी को इस तरह से मौके से हटाया गया कि इसकी भनक समय रहते किसी को नहीं लग सकी। बताया गया कि शनिवार शाम कार्यालय परिसर में लगे शीशम और जामुन के पेड़ों की कटान कराई गई।सूखे पेड़ों की आड़ में हरे पेड़ काटने का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूखे पेड़ों की आड़ में हरे-भरे शीशम, जामुन और अन्य पेड़ों की भी कटान कराई गई। लोगों का कहना है कि यदि पेड़ पहले से गिरे हुए अथवा सूखे थे तो उनकी कटान से पहले संबंधित अधिकारियों को सूचना देकर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं कराई गई। वहीं, लकड़ी को ट्रैक्टरों के जरिए परिसर से बाहर ले जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि सपरार प्रखंड के एक्सईएन अजय कुमार भारती ने सफाई देते हुए कहा कि परिसर में केवल सूखे पेड़ ही काटे गए हैं और कोई हरा पेड़ नहीं काटा गया। उनका कहना है कि जिन पेड़ों को काटा गया, वे पहले ही आंधी में गिर चुके थे।वन विभाग बोला- सरकारी परिसर में पेड़ कटान के लिए प्रक्रिया जरूरी
मामले में वन विभाग के रेंजर सत्येंद्र प्रताप ने बताया कि सरकारी परिसर में पेड़ों की कटान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सूचना वन विभाग को पहले नहीं दी गई थी। वन विभाग द्वारा मौके पर पहुंचकर लकड़ी का मूल्यांकन किया गया और कटान से संबंधित रिपोर्ट नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए वन प्रभागीय अधिकारी, हमीरपुर को भेज दी गई है। अवर अभियंता पंकज सिद्धार्थ ने बताया कि सूखी लकड़ी की कटान की गई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पेड़ वास्तव में सूखे और आंधी में गिरे हुए थे तो वन विभाग अथवा सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों को पहले सूचना क्यों नहीं दी गई? और यदि कुछ पेड़ हरे एवं खड़े थे तो उनकी कटान किसकी अनुमति से कराई गई? साथ ही काटी गई लकड़ी को परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति किस स्तर से मिली? कस्बेवासियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, मौके पर काटे गए पेड़ों का मूल्यांकन और लकड़ी के संबंध में जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
