राठ (हमीरपुर)। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राठ में आमजन को पशु के काटने या खरोंचने के बाद रेबीज से बचाव और समय पर उपचार को लेकर जागरूक किया गया। सीएचसी राठ के अधीक्षक एवं ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अरविंद कुमार यादव ने लोगों से पशु काटने की घटना को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की। डॉ. यादव ने बताया कि रेबीज गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर उचित उपचार से इससे बचाव संभव है। कुत्ते, बिल्ली या किसी संदिग्ध संक्रमित पशु के काटने अथवा खरोंचने पर सबसे पहले घाव को साबुन और बहते साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद उपलब्ध होने पर पोविडोन-आयोडीन जैसे एंटीसेप्टिक का प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घाव पर मिर्च, चूना, मिट्टी, तेल, केरोसिन या हल्दी जैसी चीजें नहीं लगानी चाहिए और न ही घाव को कसकर बांधना या खुद से बंद करना चाहिए। घटना के बाद संभव हो तो उसी दिन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। देर हो जाने पर भी उपचार के लिए तत्काल स्वास्थ्य केंद्र जाना जरूरी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि टिटनेस का इंजेक्शन रेबीज से सुरक्षा नहीं देता। गंभीर श्रेणी के काटने में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन के साथ आरआईजी या रेबीज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की आवश्यकता हो सकती है। लक्षणों का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।