हमीरपुर | राठ-पनवाड़ी स्टेट हाईवे-21 इस समय लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही और सरकारी दावों की पोल खोलता नज़र आ रहा है। एक तरफ जहां विभागीय जिम्मेदार AC कमरों में बैठकर सड़कों को ‘गड्ढा मुक्त’ घोषित करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर इस हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों की जान हर पल जोखिम में पड़ी हुई है।
सड़क पर जगह-जगह बने सैकड़ों जानलेवा गड्ढे विभाग के दावों की हवा निकाल रहे हैं। जब इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के एक्सियन दृगपाल वर्मा से बात की गई, तो उनका कहना था कि सड़क पूरी तरह से ‘चकाचक’ है। हालांकि, ज़मीनी हकीकत अफसरों के इन बयानों से कोसों दूर है। सड़क पर दूर-दूर तक दिखाई दे रहे गहरे गड्ढे यह चीख-चीखकर बयां कर रहे हैं कि कागज़ों और तस्वीरों के बीच ज़मीन-आसमान का फ़र्क है हाईवे की यह बदहाली न केवल हादसों का न्योता दे रही है, बल्कि गड्ढा भराई के लिए जारी बजट के इस्तेमाल पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है। आखिर गड्ढा भराई का बजट गया कहां? जब कागजों में सड़क दुरुस्त है, तो ज़मीन पर बदहाली का मंज़र क्यों है स्थानीय राहगीरों और वाहन चालकों के अनुसार, इस मार्ग से निकलना किसी खतरे से खाली नहीं है। कागजी खानापूर्ति के बल पर अफसरों ने सड़क को सुरक्षित तो बता दिया, लेकिन हकीकत यह है कि यह हाईवे हादसों का नया केंद्र बन चुका है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन जानलेवा गड्ढों पर संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करता है या राहगीर यूं ही हादसों के साये में सफर करने को मजबूर रहेंगे।हमीरपुर के राठ-पनवाड़ी स्टेट हाईवे-21 इस समय लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही और सरकारी दावों की पोल खोलता नज़र आ रहा है। एक तरफ जहां विभागीय जिम्मेदार AC कमरों में बैठकर सड़कों को ‘गड्ढा मुक्त’ घोषित करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर इस हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों की जान हर पल जोखिम में पड़ी हुई है।
सड़क पर जगह-जगह बने सैकड़ों जानलेवा गड्ढे विभाग के दावों की हवा निकाल रहे हैं। जब इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के एक्सियन दृगपाल वर्मा से बात की गई, तो उनका कहना था कि सड़क पूरी तरह से ‘चकाचक’ है। हालांकि, ज़मीनी हकीकत अफसरों के इन बयानों से कोसों दूर है। सड़क पर दूर-दूर तक दिखाई दे रहे गहरे गड्ढे यह चीख-चीखकर बयां कर रहे हैं कि कागज़ों और तस्वीरों के बीच ज़मीन-आसमान का फ़र्क है हाईवे की यह बदहाली न केवल हादसों का न्योता दे रही है, बल्कि गड्ढा भराई के लिए जारी बजट के इस्तेमाल पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है। आखिर गड्ढा भराई का बजट गया कहां? जब कागजों में सड़क दुरुस्त है, तो ज़मीन पर बदहाली का मंज़र क्यों है स्थानीय राहगीरों और वाहन चालकों के अनुसार, इस मार्ग से निकलना किसी खतरे से खाली नहीं है। कागजी खानापूर्ति के बल पर अफसरों ने सड़क को सुरक्षित तो बता दिया, लेकिन हकीकत यह है कि यह हाईवे हादसों का नया केंद्र बन चुका है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इन जानलेवा गड्ढों पर संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई करता है या राहगीर यूं ही हादसों के साये में सफर करने को मजबूर रहेंगे।
