हमीरपुर | मुस्करा विकासखंड क्षेत्र के इमलिया गांव में सांप के काटने से हुई एक भैंस की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पशु चिकित्सा अधिकारी पर रिश्वत मांगने, पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट बदलने और पशु मालिक के फर्जी हस्ताक्षर बनाने का गंभीर आरोप लगा है। आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने पशु अस्पताल पहुंचकर जमकर हंगामा काटा और विभागीय सांठगांठ के खिलाफ नारेबाजी की। पीड़ित ने मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) पर दर्ज कराई है इमलिया गांव निवासी अखिलेश कुमार के अनुसार, 3 सितंबर की देर शाम उनकी भैंस को सांप ने काट लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। भैंस के थन पर सांप के काटने के स्पष्ट निशान भी मौजूद थे। 4 सितंबर को इसकी सूचना इमलिया के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वंशराज पटेल को दी गई।
आरोप है कि डॉक्टर ने पोस्टमार्टम तो किया, लेकिन बीमा व सरकारी मुआवजा प्रक्रिया के अनुकूल रिपोर्ट तैयार करने के एवज में रिश्वत की मांग की। अखिलेश के अनुसार, जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो डॉक्टर ने रंजिशन पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ‘नेगेटिव’ (सांप के काटने से मौत न होना) दर्शा दिया। यही नहीं, रिपोर्ट के साथ पशु मालिक के फर्जी हस्ताक्षर वाला सहमति पत्र भी संलग्न कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया अस्पताल में ग्रामीणों का हंगामा और अवैध वसूली के आरोप
डॉक्टर की इस मनमानी से नाराज होकर दर्जनों ग्रामीण इमलिया स्थित पशु चिकित्सालय परिसर में जमा हो गए और डॉक्टर के खिलाफ प्रदर्शन किया प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने डॉक्टर पर प्राइवेट प्रैक्टिस और अवैध वसूली के भी गंभीर आरोप लगाए:
सर्वेश शुक्ला (स्थानीय निवासी): “एक महीने पहले मेरी भैंस के इलाज के नाम पर डॉ. वंशराज पटेल ने ₹1,000 ऐंठ लिए थे।”
अन्य ग्रामीण: ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में सरकारी डॉक्टर निजी इलाज के नाम पर ₹500 से ₹1,500 तक की अवैध वसूली करते हैं।
मामले में जिम्मेदार अधिकारियों व डॉक्टर के पक्ष डॉ. वंशराज पटेल (आरोपी पशु चिकित्सा अधिकारी) पोस्टमार्टम मेरे अकेले द्वारा नहीं, बल्कि करहिया मौदहा के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश गुप्ता की संयुक्त टीम द्वारा किया गया था। नियमत: शव को गड्ढे में डिस्पोज करा दिया गया है और रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी गई है। रही बात पैसों की, तो नियमानुसार मुझे प्राइवेट प्रैक्टिस का अधिकार है। जब मैं प्राइवेट तौर पर किसी के घर इलाज करने जाता हूं, तो उसका शुल्क लेता हूं।”
डॉ. भूपेंद्र सिंह (जिला पशु चिकित्सा अधिकारी) पोस्टमार्टम दो डॉक्टरों की पैनल टीम ने किया है। हालांकि, यदि पशुपालक को किसी तरह की रिश्वतखोरी या फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत है, तो वे लिखित रूप में साक्ष्य प्रस्तुत करें। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है।
