मुस्करा (हमीरपुर) | जनपद के मौजा चंदौरा में वन विभाग और स्थानीय किसानों के बीच भूमि विवाद ने तूल पकड़ लिया है। किसानों का आरोप है कि वन विभाग स्थानीय प्रशासन के पुराने आदेशों की अवहेलना करते हुए जेसीबी मशीनों के दम पर उनकी पुश्तैनी जमीनों पर जबरन कब्जा कर रहा है मामला ग्राम मौजा चंदौरा, तहसील मौदहा के गाटा संख्या 107 का है, जो करीब 789 हेक्टेयर का एक विशाल रकबा है। ग्रामीणों के अनुसार, इस जमीन में ग्राम सभा, वन विभाग और भूमिधर किसान तीनों का हिस्सा शामिल है। विवाद की जड़ यह है कि आज तक इस भूमि की न तो कोई पैमाइश हुई है और न ही सीमांकन किसानों ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 28 मार्च 1994 को तत्कालीन परगनाधिकारी मौदहा ने स्पष्ट आदेश दिया था कि पहले भूमि की पैमाइश और सीमांकन कराया जाए, उसके बाद ही वन विभाग कोई कार्रवाई करे। यही नहीं, वर्ष 2013 और 2016 में भी वन विभाग की अपीलें न्यायालय से खारिज हो चुकी हैं पीड़ित किसानों का कहना है कि 1 अप्रैल 2026 से वन विभाग अचानक मशीनों के साथ पहुंचा और बिना किसी पैमाइश के किसानों के खेतों में खाइयां खोदनी शुरू कर दीं। जब किसानों ने इसका विरोध किया और डिप्टी रेंजर व अन्य अधिकारियों को पुराने अदालती आदेश दिखाए, तो आरोप है कि अधिकारियों ने सुनने के बजाय उन्हें धमकाया अधिकारी कहते हैं कि हमारा सैटेलाइट सर्वे हो चुका है, अपनी जमीन खुद खोजो अपनी आजीविका छिनते देख दर्जनों किसानों (मनोज कुमार, शिवकुमार, मानबहादुर सिंह, अयोध्या प्रसाद आदि) प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी हमीरपुर को सौंप कर न्याय की मांग की है। किसानों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से वन विभाग की खुदाई रोकी जाए 1994 के आदेशानुसार पहले निष्पक्ष पैमाइश और सीमांकन कराया जाए किसानों को उनकी अपनी ही जमीन से बेदखल करने की कोशिश बंद हो अब देखना यह है कि प्रशासन इन गरीब किसानों की पुकार सुनता है या वन विभाग की जेसीबी यूं ही किसानों की उम्मीदों पर चलती रहेगी।
