हमीरपुर। श्री मेला जलविहार समिति राठ के तत्वावधान में जलविहार मंदिर प्रांगण में चल रही राम कथा के चौथे दिन चित्रकूट धाम से पधारे जगद्गुरु धीरेन्द्राचार्य जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान पंचवटी में निवास, शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, स्वर्ण मृग और सीता हरण की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथावाचक ने बताया कि चित्रकूट से आगे भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण घने अरण्य में प्रवेश करते हैं और अनेक ऋषि-मुनियों से भेंट करते हैं। ऋषियों ने उन्हें राक्षसों के अत्याचार और अपने कष्टों से अवगत कराया। इस पर भगवान श्रीराम ने संतों और ऋषि-मुनियों को अभय देते हुए उनकी रक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि महर्षि अगस्त्य के मार्गदर्शन में भगवान श्रीराम ने गोदावरी नदी के तट पर पंचवटी को अपना निवास बनाया। लक्ष्मण जी ने वहां पर्णकुटी का निर्माण किया। इसी दौरान रावण की बहन शूर्पणखा पंचवटी पहुंची और भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण के रूप-सौंदर्य से प्रभावित होकर विवाह का प्रस्ताव रखा। भगवान श्रीराम के मना करने पर वह लक्ष्मण के पास गई। माता सीता पर आक्रमण का प्रयास करने पर लक्ष्मण जी ने उसका नाक-कान काट दिया। अपमानित शूर्पणखा ने खर-दूषण को पूरी घटना बताई। इसके बाद खर-दूषण 14 हजार राक्षसों की सेना लेकर भगवान श्रीराम पर आक्रमण करने पहुंचे। कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने अकेले ही अपने बाणों से खर-दूषण समेत पूरी राक्षसी सेना का संहार कर दिया। कथा के मुख्य प्रसंग में महाराज ने स्वर्ण मृग और सीता हरण की कथा सुनाई। खर-दूषण के वध की सूचना मिलने पर रावण ने अपने मामा मारीच को स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी भेजा। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता मोहित हो गईं और उन्होंने श्रीराम से उसे पकड़ने का आग्रह किया। भगवान राम उसके पीछे चले गए। मारीच के वध के समय उसने राम की आवाज में ‘हे लक्ष्मण, हे सीते’ पुकार लगाई। आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो गईं और लक्ष्मण जी को भगवान राम की सहायता के लिए भेज दिया।
लक्ष्मण जी के कुटिया से बाहर जाते ही रावण साधु का वेश धारण कर वहां पहुंचा और भिक्षा मांगने के बहाने माता सीता का हरण कर लिया। रावण सीता जी को लेकर लंका की ओर जा रहा था, तभी मार्ग में पक्षीराज जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया। युद्ध में रावण ने जटायु के पंख काट दिए। इधर कुटिया लौटने पर माता सीता को वहां न पाकर भगवान श्रीराम व्याकुल हो उठे। वह लक्ष्मण के साथ वन-वन भटकते हुए सीता जी की खोज करने लगे। कथा के इस प्रसंग पर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
राम कथा में श्री मेला जलविहार समिति के अध्यक्ष केजी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, महामंत्री डॉ. राम गोपाल गुप्ता, रमेश सर्राफ, काशी प्रसाद गुप्ता, पंकज सोनी, मनोज सोनी, गिरीश अग्रवाल, राजू सोनी, बारे लाल गुप्ता, प्रदीप सोनी, श्याम करन, रविंद्र अग्रवाल, मुख्य यजमान अवधेश जड़िया सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
