राठ (हमीरपुर)। श्री मेला जल बिहार समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास श्री उत्तम कृष्ण शास्त्री ने धुंधकारी उपाख्यान के माध्यम से श्रद्धालुओं को कर्म, माता-पिता की सेवा और भगवान के स्मरण का महत्व बताया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन पर नृत्य करते नजर आए। कथा व्यास ने बताया कि धुंधकारी अपने कर्मों के कारण भयंकर प्रेत योनि को प्राप्त हुआ। गोकर्ण जी महाराज ने उसके उद्धार के लिए गया जी आदि स्थानों पर श्राद्ध कराया, लेकिन इसके बाद भी धुंधकारी का उद्धार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता को कष्ट देता है और दूसरों के प्रति द्वेष भाव रखता है, उसका आसानी से उद्धार नहीं हो सकता। मनुष्य को सदैव अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि धुंधकारी के उद्धार के लिए गोकर्ण जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण का अनुष्ठान कराया। कथा श्रवण के प्रभाव से धुंधकारी प्रेत योनि से मुक्त होकर भगवत धाम को चला गया। इसके बाद श्री शुकदेव जन्म, गुरु महिमा और कुंती स्तुति का प्रसंग सुनाया गया। उत्तरा के गर्भ की रक्षा कर भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को आश्वस्त किया, जिसके बाद माता कुंती ने भगवान की स्तुति की। ‘कृष्णाय वासुदेवाय देवकीनंदनाय च, नंदगोप कुमाराय गोविंदाय नमो नमः।’
कुंती स्तुति का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने माता कुंती से कुछ मांगने को कहा तो उन्होंने भगवान से दुख मांग लिया। उन्होंने कहा कि दुख के समय मनुष्य भगवान का अधिक स्मरण करता है, जबकि सुख आने पर वह प्रभु को भूल जाता है। इसलिए जीवन में ऐसी कृपा हो कि मनुष्य का चिंतन सदैव भगवान में लगा रहे।
उन्होंने कहा—“दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय।” कथा में समिति के अध्यक्ष केजी अग्रवाल, महामंत्री डॉ. रामगोपाल गुप्ता, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, रमेश चंद्र सर्राफ, काशी प्रसाद गुप्ता, मनोज सोनी, पंकज सोनी, राजू सोनी, प्रदीप सोनी, गिरीश अग्रवाल, राकेश मिश्रा, श्याम करन, अवधेश जड़िया, सुरेश खेवरिया सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन पर नृत्य कर धार्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
