हमीरपुर।मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध का असर अब सात समंदर पार जनपद हमीरपुर की ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। एलपीजी गैस की किल्लत से जूझ रही जनता पर अब डीजल और पेट्रोल के संकट ने ‘दोहरी मार’ मारी है। जनपद के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ईंधन का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है, जिसके चलते पंप संचालकों ने तेल की ‘राशनिंग’ शुरू कर दी है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि लोगों को एक बार फिर ‘लॉकडाउन’ जैसी पाबंदियों और किल्लत का अंदेशा सताने लगा है, जिससे पूरे जिले में दहशत का माहौल है सबसे भयावह स्थिति कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रही है। वर्तमान में रबी की फसलों की कटाई का सीजन चरम पर है। खेतों में फसल पककर तैयार है, लेकिन कंबाइन मशीनों और ट्रैक्टरों के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा है। किसान सुबह की पहली किरण के साथ ही हाथों में डिब्बे और गैलन लेकर पंपों पर लाइन लगा रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर कटाई न हुई, तो साल भर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी शहर से लेकर देहात तक, पेट्रोल पंपों पर वाहनों का रेला लगा हुआ है। कई पंप संचालकों ने व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रति वाहन तेल की सीमा तय कर दी है। तेल की इस ‘राशनिंग’ ने आम आदमी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। वहीं, जिला प्रशासन और सरकार द्वारा ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता के दावों की जमीनी हकीकत इन कतारों को अलग दर्शाती है ईंधन की अचानक आई इस कमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव ने आम जनमानस के मन में खौफ पैदा कर दिया है। बाजार में यह चर्चा आम है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो आने वाले दिनों में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई भी ठप हो सकती है। यही कारण है कि लोग अपनी जरूरत से ज्यादा ईंधन और राशन जमा करने की कोशिश में जुटे हैं, किल्लत के बीच अब तेल की कालाबाजारी की आशंका भी गहराने लगी है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ गई है।


