सरीला (हमीरपुर)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाते हुए सरीला तहसील परिसर इन दिनों बिचौलियों और प्राइवेट लोगों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। तहसील के आधे से अधिक सरकारी कार्यालयों में अनाधिकृत लोग न केवल सरकारी फाइलों से छेड़छाड़ कर रहे हैं, बल्कि खुद को सरकारी कर्मचारी बताकर फरियादियों से मोटी रकम की अवैध वसूली भी कर रहे हैं बिना लेन देन के नहीं सरकता कोई कागज़ स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिसर के सरकारी दफ्तरों में बिना चढ़ावे के कोई काम नहीं होता। अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस खेल में आम जनता पिस रही है। फरियादी दूर दराज से अपने काम के सिलसिले में तहसील के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन जब तक प्राइवेट कर्मियों की जेब गरम नहीं होती तब तक फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। राशन कार्ड बनवाने या उसमें नया यूनिट जुड़वाने आए गरीब और लाचार लोगों से प्राइवेट कर्मी खुलेआम मोटी रकम वसूल रहे हैं। पैसे न देने पर उनका काम लटका दिया जाता है अति संवेदनशील और गोपनीय माने जाने वाले कंप्यूटर कक्ष में भी बाहरी प्राइवेट लोग आराम से सरकारी डाटा और दस्तावेजों के साथ काम करते नजर आते हैं। न्यायालय कक्षों तक में बाहरी लोगों की मौजूदगी और दखलंदाजी आम बात हो गई है। जब उपजिलाधिकारी विकास यादव से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि मामले का संज्ञान लिया गया है। तहसील परिसर के कार्यालयों में अनाधिकृत रूप से काम कर रहे बाहरी लोगों की जाँच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिर्फ जाँच की खानापूर्ति न करके प्रशासन को ऐसे प्राइवेट लोगों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि सरकारी व्यवस्था पर आम जनता का विश्वास बहाल हो सके।
