गोहांड (हमीरपुर)। नगर पंचायत गोहांड में खलिहान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बनाए गए एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि राजस्व विभाग से आवश्यक अनुमति लिए बिना निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया और बाद में डंपिंग यार्ड के नाम पर लगभग 20 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021 में नगर पंचायत ने एमआरएफ सेंटर के लिए करीब 0.55 हेक्टेयर खलिहान की आरक्षित भूमि का चयन किया था। नियमानुसार ऐसी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण करने से पहले राजस्व विभाग की अनुमति आवश्यक होती है, लेकिन आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन किए बिना ही निर्माण शुरू करा दिया गया। बताया जा रहा है कि वर्ष 2022-23 में इसी परिसर में डंपिंग यार्ड के नाम पर चारदीवारी निर्माण के लिए करीब 20 लाख रुपये का भुगतान किया गया। हालांकि नए अधिशासी अधिकारी ने अभिलेखों की जांच के दौरान अनियमितताओं की आशंका जताते हुए लगभग 15 लाख रुपये के शेष भुगतान पर रोक लगा दी।
मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। यदि निर्माण एमआरएफ सेंटर का था तो भुगतान डंपिंग यार्ड के नाम पर क्यों किया गया? खलिहान की आरक्षित भूमि पर निर्माण की अनुमति किस अधिकारी ने दी? राजस्व विभाग की मंजूरी के बिना कार्य कैसे शुरू हुआ? यदि अनियमितता थी तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
शनिवार को एडीएम स्तर के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और संबंधित अभिलेखों की जांच शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले के सामने आने के बाद नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
