मुस्करा (हमीरपुर)। एक तरफ सरकार ‘स्कूल चलो अभियान’ का नारा देकर शत-प्रतिशत बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय भ्रष्टाचार के कारण नौनिहालों का स्कूल पहुँचना दूभर हो गया है। मामला विकासखंड मुस्करा के मुस्करा-गहरौली मार्ग का है, जहाँ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों की लागत से बनी सड़क अब पूरी तरह से तालाब और कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है बस्ती के अंदर उखड़ी सड़क के कारण, रामकृष्ण द्विवेदी इंटर कॉलेज के बच्चे व अन्य स्कूलों के बच्चे बेबस होकर बच्चे स्कूल जाते है मुस्करा से गहरौली मार्ग पर स्थित बस्ती के भीतर सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। इस मार्ग पर स्थित रामकृष्ण द्विवेदी इंटर कॉलेज में क्षेत्र के सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन पढ़ाई करने जाते हैं। सड़क पर गहरे गड्ढे और उनमें भरे पानी व कीचड़ के कारण स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। आए दिन मासूम बच्चे इस कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं और उनके कपड़े व कॉपियां खराब हो रही हैं हजारों की आबादी का आना-जाना दूभर ,हो रहा है जिसमे ई-रिक्शा व अन्य वाहन आये दिन पलटते रहते यह मार्ग क्षेत्र की सबसे बड़ी आबादी वाले गाँवों—गहरौली और हुसैना तगारी अलरा गौरा को कस्बा मुस्करा से जोड़ता है। रोज़ाना हज़ारों किसानों, मजदूरों और राहगीरों का आना-जाना इसी मार्ग से होता है। स्थानीय निवासी संदीप द्विवेदी ने बताया कि:
”सड़क की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि आए दिन यात्रियों से भरे ई-रिक्शा और अन्य वाहन यहाँ पलट रहे हैं, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं। किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वही दूसरी तरफ अधिकारियों चुप्पी साध रखी है ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपए की लागत से बनी यह सड़क पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। घटिया निर्माण कार्य के कारण सड़क समय से पहले ही जमींदोज़ हो गई। स्थानीय नागरिकों द्वारा इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायती पत्र सौंपे गए, लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी ने मौके पर आकर सुध लेने की ज़हमत नहीं उठाई प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से नाराज़ गहरौली और तगारी के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस मार्ग की मरम्मत और नई सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन कब जागता है और इन स्कूली बच्चों व ग्रामीणों को इस नारकीय दलदल से कब मुक्ति मिलेगी
