राठ (हमीरपुर)। श्री मेला जलविहार समिति राठ के तत्वाधान में जलविहार मंदिर प्रांगण राठ में चल रही राम कथा के सप्तम दिवस चित्रकूट धाम से पधारे धीरेन्द्राचार्य ने भगवान श्रीराम माता सीता की खोज करते हुए ऋषि मातंग के आश्रम पहुँचे। जहाँ शबरी ने प्रेमवश प्रभु को मीठे बेर चख-चखकर खिलाए।नवधा भक्ति का उपदेश देते हुए श्रीराम ने माता शबरी को आत्म-समर्पण और भक्ति के नौ प्रकार—नवधा भक्ति—का अत्यंत गूढ़ और सुंदर उपदेश दिया। जो भक्त और भगवान के बीच के प्रेम को स्पष्ट करता है। आगे बढ़ते हुए प्रभु को मार्ग में रावण द्वारा घायल किए गए गीधराज जटायु मिले।जटायु ने माता सीता के हरण की पूरी कथा श्रीराम को सुनाई और अपने प्राण त्याग दिए।भगवान राम ने अपने पिता दशरथ के समान ही जटायु का अपने हाथों से अंतिम संस्कार और पिंडदान किया। जो यह सिखाता है कि सच्चा मित्र और वीर वह है जो संकट में धर्म के लिए खड़ा हो। राम-सुग्रीव मित्रता और किष्किंधा प्रसंगकथा के अगले चरण में ऋष्यमूक पर्वत पर भगवान श्रीराम की भेंट हनुमानजी और वानर राज सुग्रीव से होती है। राम ने सुग्रीव के कष्टों को दूर करने का वचन दिया।इसके बाद भगवान श्रीराम ने बाली का वध करके सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य सौंपा और माता सीता की खोज की दिशा में आगे की योजना बनाई।
राम कथा में श्री मेला जल विहार समिति के बी के अग्रवाल श्याम सुंदर मुखिया कुरा शंकर अग्रवाल दादा रामनरेश गुप्ता उमाशंकर गुप्ता महामंत्री डॉ राम गोपाल गुप्ता,, उमाशंकर गुप्ता सत्यनारायण गुप्ता ठेकेदार दीपक अग्रवाल गिरीश अग्रवाल, राजू सोनी, सहित सेकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।
