Spread the love

राठ (हमीरपुर)। श्री मेला जल बिहार समिति के तत्वावधान में आयोजित जलविहार मेला महोत्सव के अंतर्गत चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास भागवत विद्वान श्री उत्तम कृष्ण शास्त्री ने ध्रुव चरित्र और गुरु महिमा का प्रसंग सुनाया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और भक्ति में लीन होकर नृत्य करने लगे। कथा व्यास ने बताया कि मनु महाराज की पांच संतानों में आकूति, देवहूति और प्रसूति तीन कन्याएं तथा प्रियव्रत और उत्तानपाद दो पुत्र हुए। राजा उत्तानपाद की पत्नी सुनीति के गर्भ से भगवान के परम भक्त ध्रुव जी महाराज का जन्म हुआ। उन्होंने बताया कि सौतेली माता के कटु वचनों से आहत होकर ध्रुव महज पांच वर्ष की आयु में भगवान की प्राप्ति के लिए जंगल में तपस्या करने चले गए। वहां उनकी भेंट नारद जी महाराज से हुई। नारद जी ने उन्हें गुरु मंत्र देकर आराधना का मार्ग बताया। ध्रुव ने कठिन तपस्या कर भगवान नारायण को प्रसन्न किया। भगवान ने दर्शन देकर उन्हें वरदान दिया कि वे 36 हजार वर्षों तक राज्य करेंगे। श्री शास्त्री ने कहा कि भगवत प्राप्ति में आयु बाधा नहीं है। ध्रुव ने बाल अवस्था में दृढ़ संकल्प और भक्ति से भगवान को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि गुरु का आश्रय मिलने पर गुरु शिष्य को भगवत मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। सनातन परंपरा में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु वह तत्व हैं, जो जीव को परम तत्व से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। गुरु मंत्र के माध्यम से शिष्य को परम तत्व से जोड़ते हैं। इसलिए गुरु भक्ति से ही भगवत भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा में समिति रामनरेश गुप्ता बीके अग्रवाल शंकर अग्रवाल, रमेश चंद्र सर्राफ, काशी प्रसाद गुप्ता, शिवकुमार अग्रवाल मनोज सोनी, पंकज सोनी, दीपक अग्रवाल राजू सोनी, प्रदीप सोनी, गिरीश अग्रवाल, राकेश मिश्रा, श्याम करन, अवधेश जड़िया, सुरेश खेवरिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

By AKC NEWS HINDI

AKC NEWS HINDI हमीरपुर का एक विश्वनीय समाचार पोर्टल है जो स्थानीय और राष्ट्रीय खबरे आप तक पहुचाता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *